ताजदार-ए-हरम ऐं शहंशाहे दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुदाे सलाम
हो निगह करम हम पे सुल्ताने दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
तेरी यादों से मामूर सीना रहे लब पे हर दम “मदीना मदीना” रहे
बस मैं दीवाना बन जाऊं सुल्तान-ए-दी तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
दूर रहकर न दम टूट जाए कहीं काश तैबा में ऐं मेरे माहे मुबीं
दफ्न होने को मिल जाए दो गज ज़मीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
कोई हुस्न-ए-अमल पास मेरे नहीं फंस न जाऊं क़यामत में माेला कहीं
ऐ शफीऐ उमम लाज रखना तुम ही तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
मौत के वक़्त कर दो निगाहे करम संगे दर पे तुम्हारी हो मेरी जबीन
तुम पे क़ुर्बान ऐ मेरे माह-ए-मुबीन तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
फिर बुला लो मदीने में अत्तार को दिल तड़पता है तैबा के दीदार को
कोई इस के सिवा आरज़ू ही नहीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
Naat Information
नात ख्वां: Owais Raza Qadri
क़िस्म: नात शरीफ
ज़बान: हिंदी