Hindi lyric आप निराले, शान निराली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी / Aap Nirale Shan Nirali Maqabat

आप निराले, शान निराली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

भर दो मेरी झोली ख़ाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

दर पे तुम्हारे मँगता खड़ा है, दिल में करम की आस लिए

दूर करो मेरी बद-हाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

आपकी मां ने अपने शिकम में आधा हाफ़िज़ कर डाला

आप की माँ भी अल्लाह वाली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

आप की माँ ने अपने शिकम में आधा हाफ़िज़ कर डाला

आप की माँ भी अल्लाह वाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

आप के वालिद ने अनजाना सेब जो खाया उस के ‘इवज़

बाग़ की, की बरसों रख वाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

क़ब्र में जिस दम आप का शैदा ख़ौफ़ से थर्रा उट्ठा था

आप ने आ कर लाज बचा ली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

सब कुछ मिल जाए ताहिर जो तू मिल जाए ताहिर को

तुझ से है ताहिर तेरा सवाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !

शायरः ताहिर रज़ा रामपुरी

ना’त-ख़्वाँः ताहिर रज़ा रामपुरी

कह देना सरकार से सलाम हमारा सलाम हमारा | Keh Dena Sarkar Se Salam Hamara Salam Hamara

नज़र जब आए हाजी उन के दर का हसीं नज़ारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

वो हैं जान-ए-का’बा, वो हैं शाह-ए-दो-‘आलम
देख के जिन का जल्वा झूमे ‘अर्श-ए-आ’ज़म
नबियों में कोई भी नहीं है उन के जैसा न्यारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

उन के दर पे जा के होश न उड़ने पाए
दिल की हर धड़कन पे रंग-ए-जुनूँ न छाए
बे-अदबी महबूब के दर की रब को नहीं गवारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

वो जन्नत की क्यारी रहमत की बुलवारी
जिसकी दीद की खातिर तारसे आंख हमारी
अल्लाह जाने पूरा होगा कब यह ख्वाब हमारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

पैशे नजर हो जिस दम वो दरवारे आली
हरा भरा हो गुंबद और सुनहरी जाली
उम्मत का अहवाल नबी से करना अर्ज़ हमारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

करम नबी फरमाए दे तोफीक़ खुदा दो
शहरे मदीना जाएं पैदल तुम भी देखो
जन्नत में भी नहीं मिलेगा मंजर इतना प्यारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा

नशीद-ख़्वाँः जावेद रज़ा

Produced By Zeeshan Ashraf Asjadi

Hindi Naat Lyric सुब्ह तयबा में हुई बटता है बाड़ा नूर का | Subho Taiba Mai Hui Naat Lyric

सुब्ह तयबा में हुई बटता है बाड़ा नूर का  
सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का

बाग़-ए-तयबा में सुहाना फूल फूला नूर का
मस्त-ए-बू हैं बुलबुलें पढ़ती हैं कलिमा नूर का

बारहवीं के चाँद का मुजरा है सज्दा नूर का
बारह बुर्जों से झुका एक इक सितारा नूर का

मैं गदा तू बादशाह भर दे पियाला नूर का
नूर दिन दूना तेरा, दे डाल सदक़ा नूर का

ताज वाले देख कर तेरा ‘इमामा नूर का
सर झुकाते हैं इलाही बोल-बाला नूर का

नारियों का दौर था दिल जल रहा था नूर का
तुमको देखा हो गया ठंडा कलेजा नूर का

तेरी नस्ले पाक में है बच्चा बच्चा नूर का
तू है ऐने नूर तेरा सब घराना नूर का

नूर की सरकार से पाया दोशाला नूर का
हो मुबारक तुम को जुन्नूरैन जोड़ा नूर का

चांद झुक जाता जिधर उंगली उठाते मद में
क्या ही चलता था इशारों पर खिलोना नूर का

ऐ रज़ा येह अहमदे नूरी का फ़ैज़े नूर है
हो गई मेरी ग़ज़ल बढ़ कर क़सीदा नूर का

शायरःइमाम अहमद रज़ा खान
Produced:By Zeeshan Ashraf Asjadi

Hajj 2026 Special Kalam Hindi Lyric| Tu Hai Bada Ghaffar Ya Allah | Zohaib Ashrafi

मैं आसी हूं मगर तु है बड़ा ग़फ्फार या अल्लाह
करम से अपने कर दे मेरा बेड़ा पार या अल्लाह

समा जाएं मेरे दिल में मोहब्बत के तेरे जलवे
जिधर देखूं नज़र आएं तेरे अनवार या अल्लाह

रहूं तेरी रिज़ा पर मैं हमेशा साबिरो शाकिर
न दे दुनिया का कोई ग़म मुझे आजार या अल्लाह

फ़क़त एक तेरी रहमत है मुझे जिसका सहारा है
मैं वेकस हूं नहीं कोई मेरा ग़मखार या अल्लाह

तमन्ना है कि अपनी जिंदगी में देख लूं फिर भी
तेरे प्यारे तेरे महबूब का दरबार या अल्लाह

तेरे दरियाये रहमत में हो तुग़यानी पऐ बख़्शिश
हो कासिम हश्र में जब हाज़िरे दरबार या अल्लाह

शायर = ज़ुहैब अशरफी
पोस्ट = क़ासिम शाह बरेलवी




हर एक जानिब है नूर फैला ।। Huzoor Tashrif Laa Rahe Hain Hindi Naat Lyric

हर एक जानिब है नूर फैला हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं
छुपाए फिरता है मुंह अंधेरा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

गुलों ने पाई अजीब रंगत कली ने पाई जमालो बहजत
जहां का हर एक चमन है महका हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

जमीन सजी है मिसाले दुल्हन है आसमां उसपे साया अफगन
हर एक आलम के बनके दूल्हा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

गुनहगारों को बख्शवाने खुदा से जन्नत उन्हें दिलाने
हमारे आका हमारे मौला हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

मिटेगी दुनिया से हर इक जहालत चहारसू  होगी इल्मी तलअत
लगेगा हक हक का सिर्फ नारा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

है जिनके सडदके बनी यह दुनिया जो सबके इरशाद हैं मसीहा
वो फखरे आदम वो जाने ईसा हुजूर तशरीफ़ ला रहे हैं

Manqabat 2022 | Taj Ul Shariyya | Ghulam Mustafa Qadri | Hindi, Urdu & Roman Lyrics

ताजउशशरिया ताजउशशरिया ताजउशशरिया ताजउशशरिया

गुलशन-ए-आला हज़रत की जो जान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

मसलक-ए-आला हज़रत की पहचान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

जिसके वालिद मुफ़स्सिर हैं क़ुरान के

जिसके दादा मुहाफ़िज़ हैं ईमान के

जिसका नाना बरेली का सुल्तान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

जिसके बाबा वली जिसके ताया वली

जिसके दादा वली जिसके नाना वली

जिसकी अज़मत पे हर एक क़ुर्बान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

इल्म ओ तक़वा की जो प्यारी तस्वीर है

जिसने पाई अज़ीमत की तनवीर है

इस्तक़ामत की मज़बूत चट्टान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

जो उलूम-ए-रज़ा का है वारिस बना

जिसके सर फ़ख्र-ए-अज़हर का सेहरा सजा

वो बरेली का अख़्तर रज़ा ख़ान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

तेज़ तलवार सी जिसकी तहरीर है

और बिजली की मानिंद तक़रीर है

दुश्मन-ए-दीन जिससे परेशान हैं

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

जिसकी नज़्र-ए-विलायत के हैं तज़किरे

अब भी जारी करामात के सिलसिले

हिंद में चारसू जिसका फ़ैज़ान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

एक सरों का समन्दर बरेली में था

मेरे मुर्शिद का जिस दम जनाज़ा उठा

आज भी अहल-ए-इन्सां हैरान हैं

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

हुस्न-ए-अख़्तर को कैसे करूँ मैं बयां

जिसके चेहरे को मैं देखता रह गया

देखकर जिसको मुस्काया ईमान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

कर रहा हूँ मैं मुर्शिद की अज़मत बयां

मेरे पेशे नज़र इनका है आस्तां

मेरे अख़्तर रज़ा का ये फ़ैज़ान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

कुफ्र की आंधियों से भी टकरा गया

रब ने बख्शा था ऐसा इसे हौसला

आसिमुल क़ादरी जिसपे क़ुर्बान है

मेरे ताजउशशरिया की क्या शान है

Tajushshariah Tajushshariah Tajushshariah Tajushshariah

Gulshan-e-Aala Hazrat ki jo jaan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Maslak-e-Aala Hazrat ki pehchan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Jiske walid mufassir hain Quran ke

Jiske dada muhafiz hain iman ke

Jiska nana Bareilly ka Sultan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Jiske baba wali jiske taya wali

Jiske dada wali jiske nana wali

Jiski azmat pe har ek qurban hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Ilm o taqwa ki jo pyari tasveer hai

Jisne payi azeemat ki tanweer hai

Istiqamat ki mazboot chattan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Jo uloom-e-Raza ka hai waris bana

Jiske sar Fakhr-e-Azhar ka sehra saja

Wo Bareilly ka Akhtar Raza Khan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Tez talwar si jiski tehrir hai

Aur bijli ki manind taqrir hai

Dushman-e-deen jisse pareshan hain

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Jiski nazr-e-wilayat ke hain tazkire

Ab bhi jari karamat ke silsile

Hind mein charsu jiska faizan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Ek saron ka samandar Bareilly mein tha

Mere murshid ka jis dam janaza utha

Aaj bhi ahl-e-insaan hairan hain

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Husn-e-Akhtar ko kaise karun main bayan

Jiske chehre ko main dekhta reh gaya

Dekh kar jisko muskaya iman hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Kar raha hoon main murshid ki azmat bayan

Mere peshe nazar inka hai astan

Mere Akhtar Raza ka ye faizan hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

Kufr ki aandhiyon se bhi takra gaya

Rab ne bakhsha tha aisa ise hosla

Aasimul Qadri jispe qurban hai

Mere Tajushshariah ki kya shan hai

تاج الشریعہ تاج الشریعہ تاج الشریعہ تاج الشریعہ

گلشنِ اعلیٰ حضرت کی جو جان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

مسلکِ اعلیٰ حضرت کی پہچان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

جس کے والد مفسر ہیں قرآن کے

جس کے دادا محافظ ہیں ایمان کے

جس کا نانا بریلی کا سلطان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

جس کے بابا ولی جس کے تایا ولی

جس کے دادا ولی جس کے نانا ولی

جس کی عظمت پہ ہر اک قربان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

علم و تقویٰ کی جو پیاری تصویر ہے

جس نے پائی عزیمت کی تنویر ہے

استقامت کی مضبوط چٹان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

جو علومِ رضا کا ہے وارث بنا

جس کے سر فخرِ ازہر کا سہرا سجا

وہ بریلی کا اختر رضا خان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

تیز تلوار سی جس کی تحریر ہے

اور بجلی کی مانند تقریر ہے

دشمنِ دیں جس سے پریشان ہیں

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

جس کی نذرِ ولایت کے ہیں تذکرے

اب بھی جاری کرامت کے ہیں سلسلے

ہند میں چار سو جس کا فیضان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

اک سروں کا سمندر بریلی میں تھا

میرے مرشد کا جس دم جنازہ اٹھا

آج بھی اہلِ انساں حیران ہیں

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

حسنِ اختر کو کیسے کروں میں بیاں

جس کے چہرے کو میں دیکھتا رہ گیا

دیکھ کر جس کو مسکایا ایمان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

کر رہا ہوں میں مرشد کی عظمت بیاں

میرے پیشِ نظر ان کا ہے آستاں

میرے اختر رضا کا یہ فیضان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

کفر کی آندھیوں سے بھی ٹکرا گیا

رب نے بخشا تھا ایسا اسے حوصلہ

عاصم القادری جس پہ قربان ہے

میرے تاج الشریعہ کی کیا شان ہے

Artist (Reciter): Ghulam Mustafa Qadri

Poet (Shayar): Asimul Qadri

काएनात जगमगा उठी (Kainat Jagmag Uthi) Lyrics in Hindi- Urdu & Roman English | Milad Naat

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काएनात जगमगा उठी जब मेरे हुज़ूर आ गए

क़ुदसीयों में धूम मच गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

थी रबी-उल-अव्वल बारहवीं फैली सारे जग में चांदनी

कुफ़्र की तो जां निकल गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

अक़्सा में मुसल्ला था बिछा आएंगे इमाम-उल-अम्बिया

देखते रहे सभी नबी जब मेरे हुज़ूर आ गए

अर्श को गुमान था यही सामने मेरे है क्या ज़मीं

पर ज़मीं बुलंद हो गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””

Kainat jagmaga uthi jab mere Huzoor aa gaye

Qudsiyon mein dhoom mach gayi jab mere Huzoor aa gaye

Thi Rabi-ul-Awwal barhwi phaili saare jag mein chandni

Kufr ki toh jaan nikal gayi jab mere Huzoor aa gaye

Aqsa mein musalla tha bicha aayenge Imam-ul-Anbiya

Dekhte rahe sabhi Nabi jab mere Huzoor aa gaye

Arsh ko gumaan tha yahi saamne mere hai kya zameen

Par zameen buland ho gayi jab mere Huzoor aa gaye

”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””

کائنات جگمگا اٹھی جب میرے حضور آگئے

قدسیوں میں دھوم مچ گئی جب میرے حضور آگئے

تھی ربیع الاول بارہوی پھیلی سارے جگ میں چاندنی

کفر کی تو جاں نکل گئی جب میرے حضور آگئے

اقصٰی میں مصلٰی تھا بچھا آئینگے امام الانبیاء

دیکھتے رہے سبھی نبی جب میرے حضور آگئے

عرش کو گمان تھا یہی سامنے میرے ہے کیا زمیں

پر زمیں بلند ہو گئی جب میرے حضور آگئے

Poet (Shayer)

The lyrics are credited to Khalid Mehmood Khalid.

या नबी सलाम अलैका Lyrics Hindi | Ya Nabi Salam Alaika Naat Lyrics Urdu Roman

  1. या नबी सलाम अलैका
  2. या रसूल सलाम अलैका
  3. या हबीब सलाम अलैका
  4. सलवातुल्लाह अलैका

  1. रहमतों के ताज वाले
  2. दो जहाँ के राज वाले
  3. अर्श की मेराज वाले
  4. आसियों की लाज वाले

  1. जान-कुनी के वक़्त आना
  2. कलिमा-ए-तय्यब पढ़ाना
  3. चेहरा-ए-अनवर दिखाना
  4. हमको ईमान पर उठाना

  1. वास्ता आले अबा का सदक़ा
  2. बीबी फ़ातिमा का,
  3. और शहीद-ए-कर्बला का
  4. ग़म न हो रोज़-ए-जज़ा का।

  1. जानकर काफी सहारा
  2. ले लिया है दर तुम्हारा
  3. ख़ल्क़ के वारिस खुदारा
  4. लाे सलाम अब ताे हमारा।
  1. जशने मीलादुन्नबी है
  2. नूर की चादर तनी है
  3. रौशनी ही रौशनी है
  4. हर तरफ ये धूम मची है

  1. आख़िरी लम्हे जब आएँ
  2. काश वो तशरीफ़ लाएँ
  3. अपने जलवों में गुमाएँ
  4. झूम के हम गुनगुनाएं
  1. हश्र में सरकार आना
  2. मेरे ऐब को छुपाना
  3. अपने रब से बख़्शवाना
  4. साथ जन्नत में बसाना

मुस्तफ़ा जाने रहमत पे लाखों सलाम Lyrics Hindi | Mustafa Jane Rahmat Naat Lyrics English Roman

मुस्तफा जाने रहमत पे लाखाे सलाम

शमऐ बज़मे हिदायत पे लाखाे सलाम

शहरे यारे इरम ताजदारे हरम

नाेबहारे शफाअत पे लाखाे सलाम

शबे असरा के दुल्हा पे दाइम दुरूद

नाेशऐ बज़मे जन्नत पे लाखाे सलाम

अर्श ता फर्श है जिसके ज़ेरे नगीं

उसकी क़ाहिर रियासत पे लाखाे सलाम

फत्हे बाबे नुबुव्वत पे बेहद दुरूद

खत्मे दाेरे रिसालत पे लाखाे सलाम

हम ग़रीबाें के आका़ पे बेहद दुरूद

हम फक़ीराें की सरवत पे लाखाे सलाम

जिसके जलवे से मुरझाईं कलियाँ खिलीं

उस गुले पाक मनबत पे लाखाे सलाम

दूराे नज़दीक के सुनने वाले वाे कान

काने लाले करामत पे लाखाे सलाम

जिनके सजदे काे महराबे काबा झुकीं

उन भुओं की लताफत पे लाखाे सलाम

जिस तरफ उठ गई दम मे दम आ गया

उस निगाहे इनायत पे लाखाे सलाम

जिस तारीक दिल जगमगाने लगे

उस चमक वाली रंगत पे लाखाे सलाम

पतली पतली गुलें क़ुदस की पत्तियाँ

उन लबाें की नज़ाकत पे लाखाे सलाम

वाे दहन जिसकी हर बात वहीए खुदा

चशमऐ इलमाे हिकमत पे लाखाे सलाम

वाे ज़बाँ जिसकाे सब कुन की कुनजी कहें

उसकी नाफिज़ हुकूमत पे लाखाे सलाम

हाथ जिस सम्त उठा ग़नी कर दिया

माेजे बहरे समाहत पे लाखाे सलाम

जिसकाे बारे दाे आलम की परवाह नहीं

ऐंसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखाे सलाम

नूर के चशमे लहराऐ दरया बहे

उंगलियाें की करामत पे लाखाे सलाम

जिस सुहानी घड़ी चमका तैबा का चाँद

उस दिन अफराेज़े साअत पे लाखाे सलाम

मेरे उस्ताद माँ बाप भाई बहन

अहले वुल्दाे अशीरत पे लाखाे सलाम

एक मेरा ही रहमत में दावा नहीं

शाह की सारी उम्मत पे लाखाे सलाम

काश महशर में जब उनकी आमद हाे और

भेजें सब उनकी शाेकत पे लाखाे सलाम

मुझसे खिदमत के क़ुदसी कहें हाँ रज़ा

मुस्तफा जाने रहमत पे लाखाे सलाम

🕌 Hindi में

नात ख्वां: ज़ीशान अशरफ असजदी
शायर: इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी


🕌 Mustafa Jane Rahmat Pe Lakhon Salam (Roman English)

Mustafa jaane rehmat pe lakhon salam
Sham-e-bazm-e-hidayat pe lakhon salam

Shehre yaar-e-iram tajdare haram
Nau bahar-e-shafa’at pe lakhon salam

Shab-e-asra ke dulha pe daaim durood
Nosh-e-bazm-e-jannat pe lakhon salam

Arsh ta farsh hai jiske zer-e-nageen
Uski qahir riyasat pe lakhon salam

Fath-e-baab-e-nubuwwat pe behad durood
Khatm-e-daur-e-risalat pe lakhon salam

Hum ghareebon ke aaqa pe behad durood
Hum faqeeron ki sarwat pe lakhon salam

Jiske jalwe se murjhayi kaliyan khilin
Us gul-e-pak manbat pe lakhon salam

Door-o-nazdeek ke sunne wale wo kaan
Kaan-e-laal-e-karamat pe lakhon salam

Jinke sajde ko mehrab-e-kaaba jhuki
Un bhonon ki latafat pe lakhon salam

Jis taraf uth gayi dam mein dam aa gaya
Us nigah-e-inayat pe lakhon salam

Jis tareek dil jagmagane lage
Us chamak wali rangat pe lakhon salam

Patli patli gul-e-quds ki pattiyan
Un labon ki nazakat pe lakhon salam

Wo dahan jiski har baat wahi-e-khuda
Chashm-e-ilm-o-hikmat pe lakhon salam

Wo zubaan jisko sab kun ki kunji kahen
Uski nafiz hukumat pe lakhon salam

Haath jis samt utha ghani kar diya
Mauj-e-bahr-e-samahat pe lakhon salam

Jisko bare do aalam ki parwah nahi
Aise bazu ki quwwat pe lakhon salam

Noor ke chashme lehraye darya bahe
Ungliyon ki karamat pe lakhon salam

Jis suhani ghadi chamka taiba ka chaand
Us din afroz-e-saa’at pe lakhon salam

Mere ustad maa baap bhai behan
Ahl-e-wuld o asheerat pe lakhon salam

Ek mera hi rehmat mein daawa nahi
Shah ki saari ummat pe lakhon salam

Kaash mahshar mein jab unki aamad ho aur
Bhejen sab unki shaukat pe lakhon salam

Mujhse khidmat ke qudsi kahen haan Raza
Mustafa jaane rehmat pe lakhon salam

🌍 English में

Naat Khwan: Zeeshan Ashraf Asjadi
Poet: Imam Ahmad Raza Khan Barelvi

ताजदार ए हरम सलाम लिरिक्स | Tajdar e Haram Salam Lyrics Hindi


ताजदार-ए-हरम ऐं शहंशाहे दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरुदाे सलाम


हो निगह करम हम पे सुल्ताने दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


तेरी यादों से मामूर सीना रहे लब पे हर दम “मदीना मदीना” रहे

बस मैं दीवाना बन जाऊं सुल्तान-ए-दी तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


दूर रहकर न दम टूट जाए कहीं काश तैबा में ऐं मेरे माहे मुबीं

दफ्न होने को मिल जाए दो गज ज़मीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


कोई हुस्न-ए-अमल पास मेरे नहीं फंस न जाऊं क़यामत में माेला कहीं

ऐ शफीऐ उमम लाज रखना तुम ही तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


मौत के वक़्त कर दो निगाहे करम संगे दर पे तुम्हारी हो मेरी जबीन

तुम पे क़ुर्बान ऐ मेरे माह-ए-मुबीन तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


फिर बुला लो मदीने में अत्तार को दिल तड़पता है तैबा के दीदार को

कोई इस के सिवा आरज़ू ही नहीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम


Naat Information

नात ख्वां: Owais Raza Qadri
क़िस्म: नात शरीफ
ज़बान: हिंदी