नज़र जब आए हाजी उन के दर का हसीं नज़ारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
वो हैं जान-ए-का’बा, वो हैं शाह-ए-दो-‘आलम
देख के जिन का जल्वा झूमे ‘अर्श-ए-आ’ज़म
नबियों में कोई भी नहीं है उन के जैसा न्यारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
उन के दर पे जा के होश न उड़ने पाए
दिल की हर धड़कन पे रंग-ए-जुनूँ न छाए
बे-अदबी महबूब के दर की रब को नहीं गवारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
वो जन्नत की क्यारी रहमत की बुलवारी
जिसकी दीद की खातिर तारसे आंख हमारी
अल्लाह जाने पूरा होगा कब यह ख्वाब हमारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
पैशे नजर हो जिस दम वो दरवारे आली
हरा भरा हो गुंबद और सुनहरी जाली
उम्मत का अहवाल नबी से करना अर्ज़ हमारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
करम नबी फरमाए दे तोफीक़ खुदा दो
शहरे मदीना जाएं पैदल तुम भी देखो
जन्नत में भी नहीं मिलेगा मंजर इतना प्यारा
कह देना सरकार से सलाम हमारा, सलाम हमारा
नशीद-ख़्वाँः जावेद रज़ा
Produced By Zeeshan Ashraf Asjadi