आप निराले, शान निराली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
भर दो मेरी झोली ख़ाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
दर पे तुम्हारे मँगता खड़ा है, दिल में करम की आस लिए
दूर करो मेरी बद-हाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
आपकी मां ने अपने शिकम में आधा हाफ़िज़ कर डाला
आप की माँ भी अल्लाह वाली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
आप की माँ ने अपने शिकम में आधा हाफ़िज़ कर डाला
आप की माँ भी अल्लाह वाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
आप के वालिद ने अनजाना सेब जो खाया उस के ‘इवज़
बाग़ की, की बरसों रख वाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
क़ब्र में जिस दम आप का शैदा ख़ौफ़ से थर्रा उट्ठा था
आप ने आ कर लाज बचा ली, ग़ौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
सब कुछ मिल जाए ताहिर जो तू मिल जाए ताहिर को
तुझ से है ताहिर तेरा सवाली, गौस-ए-आ’ज़म जीलानी !
शायरः ताहिर रज़ा रामपुरी
ना’त-ख़्वाँः ताहिर रज़ा रामपुरी