काएनात जगमगा उठी (Kainat Jagmag Uthi) Lyrics in Hindi- Urdu & Roman English | Milad Naat

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काएनात जगमगा उठी जब मेरे हुज़ूर आ गए

क़ुदसीयों में धूम मच गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

थी रबी-उल-अव्वल बारहवीं फैली सारे जग में चांदनी

कुफ़्र की तो जां निकल गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

अक़्सा में मुसल्ला था बिछा आएंगे इमाम-उल-अम्बिया

देखते रहे सभी नबी जब मेरे हुज़ूर आ गए

अर्श को गुमान था यही सामने मेरे है क्या ज़मीं

पर ज़मीं बुलंद हो गई जब मेरे हुज़ूर आ गए

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Kainat jagmaga uthi jab mere Huzoor aa gaye

Qudsiyon mein dhoom mach gayi jab mere Huzoor aa gaye

Thi Rabi-ul-Awwal barhwi phaili saare jag mein chandni

Kufr ki toh jaan nikal gayi jab mere Huzoor aa gaye

Aqsa mein musalla tha bicha aayenge Imam-ul-Anbiya

Dekhte rahe sabhi Nabi jab mere Huzoor aa gaye

Arsh ko gumaan tha yahi saamne mere hai kya zameen

Par zameen buland ho gayi jab mere Huzoor aa gaye

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کائنات جگمگا اٹھی جب میرے حضور آگئے

قدسیوں میں دھوم مچ گئی جب میرے حضور آگئے

تھی ربیع الاول بارہوی پھیلی سارے جگ میں چاندنی

کفر کی تو جاں نکل گئی جب میرے حضور آگئے

اقصٰی میں مصلٰی تھا بچھا آئینگے امام الانبیاء

دیکھتے رہے سبھی نبی جب میرے حضور آگئے

عرش کو گمان تھا یہی سامنے میرے ہے کیا زمیں

پر زمیں بلند ہو گئی جب میرے حضور آگئے

Poet (Shayer)

The lyrics are credited to Khalid Mehmood Khalid.

अलविदा-अलविदा-माहे-रमजान Alvida-Alvida-Mah-e-Ramzan

कलबे आशिक़ है अब पारा पारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तेरे आने से दिल खुश हुआ था

और जाेके़ इबादत बड़ा था

आह अब दिल पे है ग़म का ग़लबा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

नेकियाॅं कुछ ना हम कर सके हैं

आह इसयाँ ही में दिन हैं काटे

हाये ग़फलत में तुझकाे गुज़ारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

काेई हुसने-अमल कर सका ना

चनद आँसू नज़र कर रहा हूँ

यही मेरा है कुल असाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

जब ग़ुज़र जाऐंगे माह गयारा

तेरी आमद का फिर शाेर हाेगा

किया मेरी ज़िंदगी का भराेसा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

याद रमज़ान की तड़पा रही है

और आँसू भी जारी हुऐ हैं

कह रहा है यही हर एक कतरा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तेरे दीवाने सब राे रहे हैं

मुज़तरिब सबके सब हाे रहै हैं

काैन देगा इनहैं अब दिलासा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

बज़मे इफतार सजती थी कैसी

खूब सहरी की राेनक भी हाेती

सब समा हाे गया सूना सूना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तुम मुसलमान ताे ज़िनदा रहाेगे

इस महीने काे फिर देख लाेगे

किया मेरी ज़िंदगी का भराेसा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

साले आइंदा शाहे हरम तुम

करना हम सब पर यह करम तुम

तुम मदीने में रमजान दीखाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

वासता तुझकाे पियारे नबी का

हशर में हमकाे मत भूल जाना

राेज़े महशर हमें बखशवाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तुम पे लाखाे सलाम माहे रमज़ान

तुम पे लाखाे सलाम माहे ग़ुफरान

जाओ हाफिज़ खुदा अब तुमहारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान