Manqabat e Ghaus e Azam Lyrics || गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है || Guftgu Nirali Hai Tazkirah Nirala Hai

गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है

मेरे गाेसे आज़म का मरतबा निराला है

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उनके आसताने की शान पूछते क्या हाे

उनके दर के कुत्ते का दबदबा निराला है

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लूह क्या क़लम काे भी रखता है निगाहाे में

वाेह ज़मीन पर बेठे देखता निराला है

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वाे ताे पीरे पीरा हैं वाे ताे शाहे जीला है

मेरे ग़ाेसे आज़म का सिलसिला निराला है

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बाेला क़ुम बिइज़निल्लाह मुरदा हाे गया ज़िनदा

फातिमा का शहज़दा बाेलता निराला है

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दामने शहे जीला हम कभी ना छाेड़ेंगे

उनका ये मुजाहिद भी एक गदा निराला है

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