दुनिया वालो तुम क्या जानो रुतबा ग़ौस-ए-आज़म का लीरिक्स| Duniya walo tum kya jaano rutba Ghouse-e-Azam ka Hindi lyrics

Hindi
दुनिया वालो तुम क्या जानो रुतबा ग़ौस-ए-आज़म का
सर पे हमारे हर लम्हा है साया ग़ौस-ए-आज़म का


जिस दम तुम दफ़नाना मुझको ऐं मेरे अहबाब सुनो
क़ब्र में मेरी तुम रख देना शजरा ग़ौस-ए-आज़म का


मौला अली के नूर-ए-नज़र हैं ज़हरा के हैं लख़्त-ए-जिगर
रहमत-ए-आलम के घर से है रिश्ता ग़ौस-ए-आज़म का


होता रहेगा उर्स हमेशा सजती रहेगी बज़्म सदा
हश्र तक लहराता रहेगा झंडा ग़ौस-ए-आज़म का


Roman Urdu


Duniya walo tum kya jaano rutba Ghouse-e-Azam ka
Sar pe hamare har lamha hai saya Ghouse-e-Azam ka


Jis dam tum dafnana mujhko ain mere ain ahbab suno
Qabr mein meri tum rakh dena shajra Ghouse-e-Azam ka


Moola Ali ke Noor-e-Nazar hain Zahra ke hain Lakht-e-Jigar
Rehmat-e-Alam ke ghar se hai rishta Ghouse-e-Azam ka


Hota rahega Urs hamesha sajti rahegi bazm sada
Hashr talak lehrata rahega jhanda Ghouse-e-Azam ka


Urdu


دنیا والو تم کیا جانو رتبہ غوثِ اعظم کا
سر پہ ہمارے ہر لمحہ ہے سایا غوثِ اعظم کا


جس دم تم دفنانا مجھ کو عین میرے عین احباب سنو
قبر میں میری تم رکھ دینا شجرہ غوثِ اعظم کا


مولا علی کے نورِ نظر ہیں زہرا کے ہیں لختِ جگر
رحمتِ عالم کے گھر سے ہے رشتہ غوثِ اعظم کا


ہوتا رہے گا عرس ہمیشہ سجتی رہے گی بزم سدا
حشر تک لہراتا رہے گا جھنڈا غوثِ اعظم کا

मिला है मांगने वालों को सदक़ा ग़ौस-ए-आज़म का लिरिक्स| Mila hai mangne walo ko sadqa Ghouse-e-Azam ka Hindi lyrics

मिला है मांगने वालों को सदक़ा ग़ौस-ए-आज़म का
कभी ख़ाली नहीं लौटा है मंगता ग़ौस-ए-आज़म का


मुबारक हो रऊसानी शहर की चौखटें तुमको
हमारे वास्ते काफ़ी है टुकड़ा ग़ौस-ए-आज़म का


मेरे आमाल मुझको लेके जाएंगे जहन्नुम तक
मगर मुझको बचा लेगा वसीला ग़ौस-ए-आज़म का


मुक़द्दर के ग़नी रहबर कमेटी के जवां तुम हो
सजाया आज जो तुमने यह जलसा ग़ौस-ए-आज़म का


मेरे सरकारे सुरकाही की अज़मत पूछते क्या हो
है मेरा रहनुमा बेशक दुलारा ग़ौस-ए-आज़म का


फ़रिश्ते देख कर उसको لحد (लहद) में मुस्कुराएंगे
जो दिल से हो गया जौहर है शैदा ग़ौस-ए-आज़म का


Roman Urdu


Mila hai mangne walo ko sadqa Ghouse-e-Azam ka
Kabhi khali nahin lota hai mangta Ghouse-e-Azam ka


Mubarak ho ruoosani sheher ki chokhaten tumko
Hamare waste kafi hai tukda Ghouse-e-Azam ka


Mere aamal mujhko leke jayenge jahannam tak
Magar mujhko bachalega wasila Ghouse-e-Azam ka


Muqaddar ke ghani rehbar kameti ke jawa tum ho
Sajaya aaj jo tune ye jalsa Ghouse-e-Azam ka


Mere sarkare surkahi ki azmat poochte kiya ho
Hai mera rehnuma beshaq dulara Ghouse-e-Azam ka


Farishte dekh kar usko lehed me muskurayenge
Jo dil se ho gaya Johar hai sheda Ghouse-e-Azam ka


Urdu


ملا ہے مانگنے والوں کو صدقہ غوثِ اعظم کا
کبھی خالی نہیں لوٹا ہے منگتا غوثِ اعظم کا


مبارک ہو رؤسائے شہر کی چوکھٹیں تم کو
ہمارے واسطے کافی ہے ٹکڑا غوثِ اعظم کا


میرے اعمال مجھ کو لے کے جائیں گے جہنم تک
مگر مجھ کو بچا لے گا وسیلہ غوثِ اعظم کا


مقدر کے غنی رہبر کمیٹی کے جوں تم ہو
سجایا آج جو تم نے یہ جلسہ غوثِ اعظم کا


میرے سرکارِ سرکہی کی عظمت پوچھتے کیا ہو
ہے میرا رہنما بیشک دُلارا غوثِ اعظم کا


فرشتے دیکھ کر اس کو لحد میں مسکرائیں گے
جو دل سے ہو گیا جوہر ہے شیدا غوثِ اعظم کا

Guftagu nirali hai tazkira nirala hai Hindi lyrics | गुफ्तगू निराली है लीरिक्स | میرے غوث اعظم کا مرتبہ نرالا ہے

गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है
मेरे ग़ौस-ए-आज़म का मर्तबा निराला है


उनके आस्ताने की शान पूछते क्या हो
उनके दर के कुत्ते का दबदबा निराला है


लोह-ओ-क़लम को भी रखता है निगाहों में
वो ज़मीन पर बैठे देखता निराला है


वो तो पीर-ए-पीरां है वो तो शाह-ए-जीलां है
मेरे ग़ौस-ए-आज़म का सिलसिला निराला है


बोला ‘क़ुम बि-इज़्निल्लाह’ मुर्दा हो गया ज़िन्दा
फ़ातिमा का शहज़ादा बोलता निराला है


दामन-ए-शाह-ए-जीलां हम कभी न छोड़ेंगे
उनका यह मुजाहिद भी एक गदा निराला है

گفتگو نرالی ہے تذکرہ نرالا ہے
میرے غوث اعظم کا مرتبہ نرالا ہے

ان کے استانے کی شان پوچھتے کیا ہو
ان کے در کے کتے کا دبدبہ نرالا ہے

لوح کا قلم کو بھی رکھتا ہے نگاہوں میں
وہ زمین پر بیٹھے دیکھتا نرالا ہے

وہ تو پیر پیرا ہے وہ تو شاہ جیلاں ہے
میرے غوث اعظم کا سلسلہ نرالا ہے

بولا قم باذن اللہ مردہ ہو گیا زندہ
فاطمہ کا شہزادہ بولتا نرالا ہے

دامن شہ جیلاں ہم کبھی نہ چھوڑیں گے
ان کا یہ مجاہد بھی ایک گدا نرالا ہے

Roman Urdu


Guftagu nirali hai tazkira nirala hai
Mere Ghaus-e-Azam ka martaba nirala hai


Unke aastane ki shaan poochte kya ho
Unke dar ke kutte ka dabdaba nirala hai


Loh-o-qalam ko bhi rakhta hai nigahon mein
Woh zameen par baithe dekhata nirala hai


Woh to Pir-e-Piran hai woh to Shah-e-Jilan hai
Mere Ghaus-e-Azam ka silsila nirala hai


Bola ‘Qum Bi-Iznillah’ murda ho gaya zinda
Fatima ka shahzada bolta nirala hai


Daaman-e-Shah-e-Jilan hum kabhi na chhodenge
Unka yeh Mujahid bhi ek gada nirala hai

खुदा के फजल से हम पर है साया गौसे आजम का नात लिरिक्स | khuda ke Fazal Se hum par Naat lyrics Hindi | Manqabat Ghous e Aazam Hindi lyrics

खुदा के फजल से हम पर है साया गौ़से आज़म का
हमें दोनों जहां में है सहारा गौ़से आज़म का

मुरीदी ला-तख़फ कहकर तसल्ली दी गुलामों को
क़यामत तक रहे बेखौफ बंदा गौ़से आज़म का

हमारी लाज किसके हाथ है बग़दाद वाले के
मुसीबत टाल देना काम किसका गौ़से आज़म का

गए एक वक़्त में सत्तर मुरीदों के यहां हज़रत
समझ में आ नहीं सकता मुअम्मा गौ़से आज़म का

मोहम्मद का रसूलों में है जैसे मर्तबा आला
है अफ़ज़ल औलिया में यूं ही रुतबा गौ़से आज़म का

अज़ीज़ो कर चुको तय्यार जब मेरे जनाजे़ को
तो लिख देना कफन पर नामे वाला गौ़से आज़म का

लहद में जब फरिश्ते मुझसे पूछेंगे तो कह दूंगा
तारीक़ा कादरी हूं नाम लेवा गो़से आज़म का

निदा देगा मुनादी हश्र में यूं कादरियों को
किधर हैं क़ादरी करलें नज़ारा गौ़से आज़म का

फरिश्तों रोकते क्यों हो मुझे जन्नत में जाने से
यह देखो हाथ में दामन है किसका गौ़से आज़म का

जनाबे गौ़स दूल्हा और बाराती औलिया होंगे
मज़ा दिखलाएगा मेहशर में सेहरा गौ़से आज़म का

मुख़ालिफ़ क्या करें मेरा की है बेहद करम मुझ पर
खुदा का, रेहमतुललिल आलमीं का, गौ़से आज़म का

कभी कदमों पे लौटूंगा कभी दामन पे मचलूंगा
बता दूंगा के यूं छूटता है बंदा गौ़से आज़म का

जमीले क़ादरी सो जां से कुर्बान मुर्शिद पर
बनाया जिसने तुझ जैसे को बंदा गौ़से आज़म का

शायर: जमीलुर-रहमान क़ादरी
नात खां: उवैस रज़ा का़दरी

कादरी आस्ताना सलामत रहे हिंदी लिरिक्स || Mustafa ka Gharana salamat Rahe Hindi lyrics || Manqabat ghouse Azam lyrics

कादरी आस्ताना सलामत रहे
मुस्तफा का घराना सलामत रहे

पल रहे हैं जहां से यह दोनों जहां
वोह सखी आस्ताना सलामत रहे

पल रहे हैं जहां से यह शाहो गदा
वो सखी आस्ताना सलामत रहे

दर्दमंदों के सर पर है साया फिगन
आपका शामियाना सलामत रहे

तुमसे मंसूब है जिंदगी का निसाब
हश्र तक यह फसाना सलामत रहे

ये नकीरैन बोले मुझे कब्र में
मुस्तफा का दीवाना सलामत रहे

हक्म था के अदा हों नमाज़ें पचास
आपका आना जाना सलामत रहे

है क़यामत तलक हर ज़माना तेरा
तेरा हर एक ज़माना सलामत रहे

गौ़स की महफिलें फिर से सजने लगीं
सुन्नियों का घराना सलामत रहे

इतरते फातिमा पर उजागर निसार
सैय्यदा का घराना सलामत रहे

शायर: निसार अली उजागर
नात खां: गुलाम मुस्तफा का़दरी


Aap Nirale Shan Nirali Naat Lyric in Hindi आप निराले शान निराली hindi lyric Manqabat Ghous e Aazam Lyric

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

दर पे तुम्हारे मंगता खड़ा है दिल में करम की आस लिए
दूर करो मेरी बदहाली गौसे आज़म जीलानी

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

आपकी मां ने अपने शिकम में आधा हाफ़िज़ कर डाला
आपकी मां भी अल्लाह वाली गौसे आज़म जीलानी

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

आपके वालिद ने अंजाना सेब जो खाया उसके इवज़
बाग़ की, की बरसो रखवाली गौसे आज़म जीलानी

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

कब्र मैं जिस दम आपका शैदा खौफ से थर्रा उठा था
आपने आकर लाज बचा ली गौसे आज़म जीलानी

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

सब कुछ मिल जाए ताहिर जो तू मिल जाए ताहिर को
तुझसे है ताहिर तेरा सवाली गौसे आज़म जीलानी

आप निराले शान निराली गौसे आज़म जीलानी
भर दो हमारी झोली खाली गौसे आज़म जीलानी

शायर: ताहिर रज़ा रामपुरी

Hafiz Tahir Qadri – Ghous Ka Aastana Salamat Rahe – Manqabat Ghous e Aazam 2026

नूर का आशियाना सलामत रहे
ग़ौस का आस्ताना सलामत रहे

शाहे बगदाद है सैय्यदुलऔलिया
रुतबऐ आलीशाना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

रोज़ऐ गौस पर रहमतों की फुवार
यह हंसी आशियाना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

नाम से इनके टलती हैं सब मुश्किलें
इनका लब पे तराना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

गौस का दर दिखाया है जिसने हमें
वो रज़ा का घराना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

पर्चमें गौस का दुनिया भर में यूंही
या खुदा लहलहाना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

फज़ले मौला से असीम मैं हूं कादरी
ये ताल्लुक पुराना सलामत रहे

नूर का आशियाना सलामत रहे
गौस का आस्ताना सलामत रहे

शायर: आसिम
नात खां: हाफ़िज़ ताहिर कादरी

Manqabat e Ghaus e Azam Lyrics || गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है || Guftgu Nirali Hai Tazkirah Nirala Hai

गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है

मेरे गाेसे आज़म का मरतबा निराला है

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उनके आसताने की शान पूछते क्या हाे

उनके दर के कुत्ते का दबदबा निराला है

.

लूह क्या क़लम काे भी रखता है निगाहाे में

वाेह ज़मीन पर बेठे देखता निराला है

.

वाे ताे पीरे पीरा हैं वाे ताे शाहे जीला है

मेरे ग़ाेसे आज़म का सिलसिला निराला है

.

बाेला क़ुम बिइज़निल्लाह मुरदा हाे गया ज़िनदा

फातिमा का शहज़दा बाेलता निराला है

.

दामने शहे जीला हम कभी ना छाेड़ेंगे

उनका ये मुजाहिद भी एक गदा निराला है