कादरी आस्ताना सलामत रहे
मुस्तफा का घराना सलामत रहे
पल रहे हैं जहां से यह दोनों जहां
वोह सखी आस्ताना सलामत रहे
पल रहे हैं जहां से यह शाहो गदा
वो सखी आस्ताना सलामत रहे
दर्दमंदों के सर पर है साया फिगन
आपका शामियाना सलामत रहे
तुमसे मंसूब है जिंदगी का निसाब
हश्र तक यह फसाना सलामत रहे
ये नकीरैन बोले मुझे कब्र में
मुस्तफा का दीवाना सलामत रहे
हक्म था के अदा हों नमाज़ें पचास
आपका आना जाना सलामत रहे
है क़यामत तलक हर ज़माना तेरा
तेरा हर एक ज़माना सलामत रहे
गौ़स की महफिलें फिर से सजने लगीं
सुन्नियों का घराना सलामत रहे
इतरते फातिमा पर उजागर निसार
सैय्यदा का घराना सलामत रहे
शायर: निसार अली उजागर
नात खां: गुलाम मुस्तफा का़दरी