कादरी आस्ताना सलामत रहे हिंदी लिरिक्स || Mustafa ka Gharana salamat Rahe Hindi lyrics || Manqabat ghouse Azam lyrics

कादरी आस्ताना सलामत रहे
मुस्तफा का घराना सलामत रहे

पल रहे हैं जहां से यह दोनों जहां
वोह सखी आस्ताना सलामत रहे

पल रहे हैं जहां से यह शाहो गदा
वो सखी आस्ताना सलामत रहे

दर्दमंदों के सर पर है साया फिगन
आपका शामियाना सलामत रहे

तुमसे मंसूब है जिंदगी का निसाब
हश्र तक यह फसाना सलामत रहे

ये नकीरैन बोले मुझे कब्र में
मुस्तफा का दीवाना सलामत रहे

हक्म था के अदा हों नमाज़ें पचास
आपका आना जाना सलामत रहे

है क़यामत तलक हर ज़माना तेरा
तेरा हर एक ज़माना सलामत रहे

गौ़स की महफिलें फिर से सजने लगीं
सुन्नियों का घराना सलामत रहे

इतरते फातिमा पर उजागर निसार
सैय्यदा का घराना सलामत रहे

शायर: निसार अली उजागर
नात खां: गुलाम मुस्तफा का़दरी