खुदा के फजल से हम पर है साया गौ़से आज़म का
हमें दोनों जहां में है सहारा गौ़से आज़म का
मुरीदी ला-तख़फ कहकर तसल्ली दी गुलामों को
क़यामत तक रहे बेखौफ बंदा गौ़से आज़म का
हमारी लाज किसके हाथ है बग़दाद वाले के
मुसीबत टाल देना काम किसका गौ़से आज़म का
गए एक वक़्त में सत्तर मुरीदों के यहां हज़रत
समझ में आ नहीं सकता मुअम्मा गौ़से आज़म का
मोहम्मद का रसूलों में है जैसे मर्तबा आला
है अफ़ज़ल औलिया में यूं ही रुतबा गौ़से आज़म का
अज़ीज़ो कर चुको तय्यार जब मेरे जनाजे़ को
तो लिख देना कफन पर नामे वाला गौ़से आज़म का
लहद में जब फरिश्ते मुझसे पूछेंगे तो कह दूंगा
तारीक़ा कादरी हूं नाम लेवा गो़से आज़म का
निदा देगा मुनादी हश्र में यूं कादरियों को
किधर हैं क़ादरी करलें नज़ारा गौ़से आज़म का
फरिश्तों रोकते क्यों हो मुझे जन्नत में जाने से
यह देखो हाथ में दामन है किसका गौ़से आज़म का
जनाबे गौ़स दूल्हा और बाराती औलिया होंगे
मज़ा दिखलाएगा मेहशर में सेहरा गौ़से आज़म का
मुख़ालिफ़ क्या करें मेरा की है बेहद करम मुझ पर
खुदा का, रेहमतुललिल आलमीं का, गौ़से आज़म का
कभी कदमों पे लौटूंगा कभी दामन पे मचलूंगा
बता दूंगा के यूं छूटता है बंदा गौ़से आज़म का
जमीले क़ादरी सो जां से कुर्बान मुर्शिद पर
बनाया जिसने तुझ जैसे को बंदा गौ़से आज़म का
शायर: जमीलुर-रहमान क़ादरी
नात खां: उवैस रज़ा का़दरी