गुफ्तगू निराली है तज़किरा निराला है
मेरे गाेसे आज़म का मरतबा निराला है
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उनके आसताने की शान पूछते क्या हाे
उनके दर के कुत्ते का दबदबा निराला है
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लूह क्या क़लम काे भी रखता है निगाहाे में
वाेह ज़मीन पर बेठे देखता निराला है
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वाे ताे पीरे पीरा हैं वाे ताे शाहे जीला है
मेरे ग़ाेसे आज़म का सिलसिला निराला है
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बाेला क़ुम बिइज़निल्लाह मुरदा हाे गया ज़िनदा
फातिमा का शहज़दा बाेलता निराला है
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दामने शहे जीला हम कभी ना छाेड़ेंगे
उनका ये मुजाहिद भी एक गदा निराला है