अलविदा-अलविदा-माहे-रमजान Alvida-Alvida-Mah-e-Ramzan

कलबे आशिक़ है अब पारा पारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तेरे आने से दिल खुश हुआ था

और जाेके़ इबादत बड़ा था

आह अब दिल पे है ग़म का ग़लबा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

नेकियाॅं कुछ ना हम कर सके हैं

आह इसयाँ ही में दिन हैं काटे

हाये ग़फलत में तुझकाे गुज़ारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

काेई हुसने-अमल कर सका ना

चनद आँसू नज़र कर रहा हूँ

यही मेरा है कुल असाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

जब ग़ुज़र जाऐंगे माह गयारा

तेरी आमद का फिर शाेर हाेगा

किया मेरी ज़िंदगी का भराेसा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

याद रमज़ान की तड़पा रही है

और आँसू भी जारी हुऐ हैं

कह रहा है यही हर एक कतरा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तेरे दीवाने सब राे रहे हैं

मुज़तरिब सबके सब हाे रहै हैं

काैन देगा इनहैं अब दिलासा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

बज़मे इफतार सजती थी कैसी

खूब सहरी की राेनक भी हाेती

सब समा हाे गया सूना सूना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तुम मुसलमान ताे ज़िनदा रहाेगे

इस महीने काे फिर देख लाेगे

किया मेरी ज़िंदगी का भराेसा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

साले आइंदा शाहे हरम तुम

करना हम सब पर यह करम तुम

तुम मदीने में रमजान दीखाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

वासता तुझकाे पियारे नबी का

हशर में हमकाे मत भूल जाना

राेज़े महशर हमें बखशवाना

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान

तुम पे लाखाे सलाम माहे रमज़ान

तुम पे लाखाे सलाम माहे ग़ुफरान

जाओ हाफिज़ खुदा अब तुमहारा

अलवदा-अलवदा-माहे-रमजान