या हुसैन आली मक़ाम तुम पे करोड़ों सलाम
रात दिन और सुबहों शाम तुम पे करोड़ों सलाम
पाये आबिद चूमकर बेड़ी बोलीं झूमकर
में ना डालूँगी निशान तुम पे करोड़ों सलाम
बाप हैं शेर ए ख़ुदा नाना हैं खैरुल वरा
तुम हो जन्नत के मेहमान तुम पे करोड़ों सलाम
सूखा गला शीर का ज़ख़्म खाया तीर का
नन्ने असग़र भी क़ुर्बान तुम पे करोड़ों सलाम
असग़र को भी दे दिया अकबर को भी दे दिया
नाना की उम्मत के नाम तुम पे करोड़ों सलाम