हर एक जानिब है नूर फैला ।। Huzoor Tashrif Laa Rahe Hain Hindi Naat Lyric

हर एक जानिब है नूर फैला हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं
छुपाए फिरता है मुंह अंधेरा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

गुलों ने पाई अजीब रंगत कली ने पाई जमालो बहजत
जहां का हर एक चमन है महका हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

जमीन सजी है मिसाले दुल्हन है आसमां उसपे साया अफगन
हर एक आलम के बनके दूल्हा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

गुनहगारों को बख्शवाने खुदा से जन्नत उन्हें दिलाने
हमारे आका हमारे मौला हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

मिटेगी दुनिया से हर इक जहालत चहारसू  होगी इल्मी तलअत
लगेगा हक हक का सिर्फ नारा हुजूर तशरीफ ला रहे हैं

है जिनके सडदके बनी यह दुनिया जो सबके इरशाद हैं मसीहा
वो फखरे आदम वो जाने ईसा हुजूर तशरीफ़ ला रहे हैं

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