मैं आसी हूं मगर तु है बड़ा ग़फ्फार या अल्लाह
करम से अपने कर दे मेरा बेड़ा पार या अल्लाह
समा जाएं मेरे दिल में मोहब्बत के तेरे जलवे
जिधर देखूं नज़र आएं तेरे अनवार या अल्लाह
रहूं तेरी रिज़ा पर मैं हमेशा साबिरो शाकिर
न दे दुनिया का कोई ग़म मुझे आजार या अल्लाह
फ़क़त एक तेरी रहमत है मुझे जिसका सहारा है
मैं वेकस हूं नहीं कोई मेरा ग़मखार या अल्लाह
तमन्ना है कि अपनी जिंदगी में देख लूं फिर भी
तेरे प्यारे तेरे महबूब का दरबार या अल्लाह
तेरे दरियाये रहमत में हो तुग़यानी पऐ बख़्शिश
हो कासिम हश्र में जब हाज़िरे दरबार या अल्लाह
शायर = ज़ुहैब अशरफी
पोस्ट = क़ासिम शाह बरेलवी